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सीधा सवाल। बेगूं। चित्तौड़गढ़ के जिले के बेगूं में अरावली बचाओ अभियान की शुरुआत युवाओं की टीम ने शुक्रवार को केसरिया चौक से की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अरावली पर्वतमाला के 100 मीटर तक खनन की अनुमति सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए जाने पर चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं में युवाओं की टीम परशुराम मित्र मंडल ने सेव अरावली अभियान की शुरूआत बेगूं के केसरिया चौक में शुक्रवार से की है। इस अवसर पर परशुराम मित्र मंडल के कार्यकर्ताओं द्वारा अरावली बचाओ मिशन के पक्ष में नारेबाजी की गई। युवाओं ने अरावली बचाना है, राजस्थान बचाना है। जल जंगल जमीन बचाना है, अरावली बचाना है जैसे नारों की नारेबाजी कर अरावली पर्वत माला को सरंक्षित करने की मांग की। अरावली पर्वतमाला को 100 मीटर से कम करने के फैसले के बाद श्री परशुराम मित्र मंडल द्वारा बेगूं नगर के केसरिया चौक में विरोध किया गया। युवाओं ने बताया कि अरावली पर्वतमाला को लेकर यह फैसला आया है कि 100 मीटर से नीचे के पहाड़ काटे जा सकते हैं और 100 मीटर से ऊपर के पहाड़ों को छोड़ा जाएगा, जो पर्यावरण की दृष्टि से पूरी तरह उचित नहीं कहा जा सकता है। यह फैसला प्रकृति को टुकड़ों में बांट कर देखने जैसा है, जबकि प्रकृति को ऊंचाई नहीं बल्कि समग्रता से समझने की आवश्यकता है। पहाड़ चाहे 100 मीटर से नीचे हो वह सभी पर्यावरण संतुलन, वायु शुद्धिकरण, भूजल संरक्षण और जीव विविधता के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। नीचे के पहाड़ को काटने से धूलकण बढ़ेंगे, जिससे वायु प्रदूषण में वृद्धि होगी और आसपास के क्षेत्र में सांस संबंधी बीमारियां बढ़ेगी। यदि इसके किसी भी हिस्से को नष्ट किया गया तो इसका सीधा प्रभाव तापमान वृद्धि, वर्षा में कमी, जल संकट और प्रदूषण के रूप में दिखाई देगा। केवल ऊंचाई के आधार पर पहाड़ों को काटा जाए, यह वैज्ञानिक और पर्यावरण की दृष्टि से गलत प्रतीत होता है। आज आवश्यकता है कि हम विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए। विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश करना आत्मघाती कदम है। ऐसे में कोर्ट और सरकार को मिलकर ऐसे निर्णय लेने चाहिए जो आने वाले पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करें। इस अवसर पर राजेश सैन, कमल किशोर माथुर, विजय गौड, गोपाल भारद्वाज, जयनारायण भारद्वाज, अजय गौड, कैलाश छीपा, राजेश भारद्वाज, हरीश शर्मा, ललित शर्मा, कुलदीप भारद्वाज, ब्रजेश यादव, धर्मेंद्र झँवर, गोविंद शिल्पकार, योगेश, भानुप्रताप सोनी, सोनू लखारा, सानु डिडवानिया सहित परशुराम मित्र मंडल के कार्यकर्ता उपस्थित थे।