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चंद्रनगर में बनाओ मकान सिस्टम है सेट, अवैध रूप से कॉलोनी काटकर लॉटरी से बेचने का मामला
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। उप नगरीय क्षेत्र चंदेरिया में अवैध रूप से चंद्रनगर नाम से कृषि भूमि में लॉटरी के माध्यम से बिना स्वीकृति के कॉलोनी काटने के मामले में अवैध कॉलोनाइजर और भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि एक और जहां प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए पूरे मामले की मौका जांच रिपोर्ट बनवाते हुए कार्यवाही की तैयारी कर ली है। वहीं दूसरी ओर सूत्रों का कहना है कि अवैध कॉलोनाइजर भू माफिया मामला सामने आने के बाद पेराफेरी की जमीन मे खरीददारों को यह दावा कर रहे हैं कि वह निर्माण कार्य चालू करें कोई भी उनको रुकवाने वाला नहीं है यूआईटी और प्रशासन में पूरा सिस्टम सेट है। इससे लगने लगा है कि यह भू माफिया अपनी साख बचाने के लिए प्रशासन यूआईटी जैसी सरकारी संस्थाओं को भी खुली चुनौती दे रहे हैं। साथ ही जनमानस में अवैध रूप से कॉलोनी काटकर जमीन बेचने के बाद अपरोक्ष रूप से मिली भगत का भी दावा कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में अवैध चंद्रनगर के मामले में जहां जिला कलेक्टर आलोक रंजन पूरी गंभीरता दिखाते हुए ठोस कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर इस तरह के दावे यूआईटी की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
धरातल पर कुछ नहीं और प्रशासन को खुली चुनौती
लॉटरी के माध्यम से अवैध रूप से चंद्र नगर कॉलोनी के नाम से आवासीय कॉलोनी बता कर सैकड़ो भूखंड काट दिए गए। इन भूखंडों में से 85% से अधिक बेच दिए गए हैं। कागजी रूप से एक नक्शा बनाकर खरीदारों को यह नक्शा दिखाया जा रहा है वही भूखंड लेने पर लॉटरी के माध्यम से कार मोटरसाइकिल जैसे बड़े उपहार देने का झांसा दिया जा रहा है। राजस्थान में लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह से प्रतिबंधित है। धरातल पर सड़क पानी बिजली और सामुदायिक उपयोग जैसी कोई भी व्यवस्था मौजूद नहीं है। जबकि किसी भी कन्वर्टेड रजिस्टर्ड कॉलोनी में इन व्यवस्थाओं के लिए भूमि आरक्षित की जाती है। नियमों की बात करें तो कुल भूमि से 52% भूमि का ही रूपांतरण हो पाता है। लेकिन चंद्रनगर के मामले में 85 से 90% भूमि पर भूखंड काट दिए गए हैं वहीं सड़कों का क्षेत्रफल भी नियमों के अनुरूप नहीं है। नियमों के जानकारों की माने तो यूआईटी और नगर परिषद क्षेत्र में 40 से 45 फीट तक सड़क होना अनिवार्य है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 35 फीट सड़क के प्रावधान है। पेरा फेरी क्षेत्र में स्थानीय निकाय के नियम लागू होते हैं चंदेरिया उपनगर क्षेत्र के समीप स्थित इस 37 बीघा भूमि में ग्राम पंचायत की भूमि होने का हवाला देते हुए गंगरार तहसील में इसकी हक बंटवारा रजिस्ट्री करवाते हुए 800 स्क्वायर फीट के भूखंड को कृषि भूमि बढ़कर पंजीकरण करवाया जा रहा है। यानी की स्थानीय निकाय को होने वाली आई और सुविधाओं के लिए होने वाले खर्च का नुकसान करते हुए यह भू माफिया अवैध रूप से कॉलोनाइजर बनकर लोगों को चूना लगा रहे हैं।
सरकार पर पड़ेगा भार कौन जिम्मेदार ?
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार विभिन्न शिविरों के माध्यम से पट्टो के वितरण को लेकर प्राथमिकता से कार्य करती है। और ऐसे में राजस्व की राशि भी कम होती है साथ ही शिविर के दौरान अधिक संख्या में लोगों के आने से भौतिक सत्यापन भी नहीं हो पता है। और बाद में लोग धरने प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से सड़क पानी और नाली की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हैं। जबकि मूलभूत रूप से यह सारी जिम्मेदारी कॉलोनाइजर की होती है। चित्तौड़गढ़ नगर परिषद और यूआईटी क्षेत्र में कई ऐसी कॉलोनी है जहां पंजीकरण के बाद भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है वही ऐसे अवैध कॉलोनाइजर अपने निजी फायदे के लिए सरकार को बदनाम करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। और इतना होने पर भी सूत्रों की माने तो पूरा सिस्टम सेट होने का दावा कर रहे हैं। इससे लगता है कि ऐसे लोगों पर यदि कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में यह भू माफिया अपनी जेब भरकर गायब हो जाएंगे,जो नियमों को बाईपास करते हुए शुरुआत से ही सरकार प्रशासन और सिस्टम के सेट होने के दावे करते हुए बदनाम करने का षड्यंत्र रच रहे हैं।
पूरे जिले भर में चल रहा खेल
अवैध रूप से कॉलोनी काटकर लॉटरी के माध्यम से बेचने का खेल न केवल चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय बल्कि बस्सी निंबाहेड़ा रोलहेरा सहित जिले के अलग-अलग क्षेत्र में स्थानीय निकायों को आर्थिक नुकसान करने का खुला खेल चल रहा है।
अवैध चन्द्रनगर के मामले में एक अधिकारी की भूमिका संदिग्ध!
चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय के चंदेरिया क्षेत्र में अवैध रूप से विक्रय की जा रही चंद्र नगर आवासीय कॉलोनी के मामले में सूत्रों से एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि जिले के प्रशासन में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे एक अधिकारी की भी इस कॉलोनी के मामले में भूमिका है। सूत्रों का यहां तक कहना है की इस अवैध कॉलोनी के मामले में इस अधिकारी की भी हिस्सेदारी है। और इसीलिए हक बंटवारे की रजिस्ट्री को लेकर जहां लोगों को चक्कर लगाने पड़ते हैं वही इस भूमि के मामले में रजिस्ट्री भी हाथोहाथ हो रही है। और इसीलिए संभव है कि अवैध कॉलोनी को काटकर बेचने वाले खुली चुनौती देते हुए बिना पंजीकरण और बिना कन्वर्जन के इस अवैध कॉलोनी में निर्माण करने और इस निर्माण को किसी भी अधिकारी द्वारा नहीं रुकवाने का दावा कर रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि जिला कलेक्टर के निर्देशों के बाद नगर विकास न्यास के सचिव ऐसे भू माफिया के खिलाफ क्या कार्रवाई कर पाते हैं। या सूत्रों के अनुसार अधिकारी की भूमिका से चुप्पी साध जाते हैं।