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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। शहर में दुर्ग रोड पर एक बार्न ओवल कौतूहल का विषय बन गया, जब करीब 50 फुट ऊंचे पेड़ पर एक दुर्लभ बार्न उल्लू पतंग के चाइनीज धागे में बुरी तरह उलझा दिखाई दिया। तेज धार वाले इस धागे ने उल्लू के पूरे शरीर को जकड़ रखा था। ऊपर से पेड़ के आसपास बिजली के खुले तार लटक रहे थे।
वन्य जीव प्रेमी मनीष तिवारी ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोगों ने वन विभाग को सूचना दी। सूचना पर वन विभाग और वन्य जीव प्रेमी की रेस्क्यू टीम के मुबारिक खान और पीयूष कांबले मौके पर पहुंचे। मौके पर पहुंच कर देखा तो बिजली विभाग और फायर डिपार्टमेंट की भी आवश्यकता महसूस हुई। दोनों विभाग को सूचित कर फायर डिपार्टमेंट से ऑटोमैटिक लैडर मंगवाई गई और बिजली विभाग को सूचित कर पूरे इलाके की बिजली सप्लाई बंद करवाई गई—ताकि ऑपरेशन सुरक्षित हो सके।
ऊंचाई पर जिंदगी की जंग
लैडर पर चढ़कर वन्य जीव प्रेमी मुबारिक खान ने बिजली तारों और ऊंचाई के बीच संतुलन बनाते हुए बेहद सूझबूझ से धागा काटा। नीचे टीम ने जाल बिछाकर सुरक्षा घेरा बनाया। जैसे ही धागा कटा, उल्लू नीचे की ओर गिरने लगा।
इसी क्षण पीयूष कांबले ने बिजली जैसी फुर्ती दिखाते हुए उल्लू को बिना किसी चोट के सुरक्षित पकड़ लिया। उसके शरीर पर कई जगह लिपटे धागों को सावधानी से हटाया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।
जंगल में नई उड़ान
वन विभाग के सहयोग से उल्लू का निरीक्षण किया गया और फिर उसे जंगल में सुरक्षित छोड दिया गया। कुछ ही पलों में उल्लू ने स्वतंत्र उड़ान भर ली। यह रेस्क्यू ऑपरेशन न सिर्फ साहस और टीमवर्क की मिसाल बना, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि चाइनीज धागा केवल इंसानों के लिए नहीं, बेजुबान पक्षियों के लिए भी जानलेवा है। पीयूष कांबले और उनकी टीम का एक ही मकसद वन्य जीवों की रक्षा, और चित्तौड़गढ़ में यह जज्बा बार-बार दिखता रहा है।