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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। लघु उद्योग भारती महिला इकाई की ओर से आयोजित तीन दिवसीय स्वयं सिद्धा स्वदेशी मेला संपन्न हुआ। अंतिम दिवस सोमवार को भी मेले में जनभागीदारी से महिला पदाधिकारी उत्साहित रही। मुख्य आकर्षण इस्कोन के सहयोग से आयोजित दिव्य कृष्ण भजन संध्या एवं फाग उत्सव रहा। रंगीलो राजस्थान थीम के अनुरूप लघु उद्योग भारती महिला इकाई की सदस्याएं फाग साड़ियों में सुसज्जित होकर कार्यक्रम में सम्मिलित हुईं। भक्ति, संगीत और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर इस संध्या ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश दिया। समापन समारोह में सांसद सी.पी. जोशी ने पहुंच कर महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने हेतु ऐसे और मंचों की आवश्यकता पर बल दिया। स्वयं सिद्धा 2025 के सफल आयोजन के लिए लघु उद्योग भारती के प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रीय सचिव अंजू सिंह जयपुर ने भी कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए टीम को मार्गदर्शन देते हुए महिला इकाई के प्रयास को सराहा। एसपी मनीष त्रिपाठी, धर्मपत्नी श्रीमती वर्षा त्रिपाठी के साथ पहुंचे व मेले के प्रत्येक स्टॉल का अवलोकन कर लघु उद्योग भारती महिला इकाई के प्रयासों की सराहना करते हुए महिला उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया। वही प्रांतीय महामंत्री प्रवीण गुप्ता एवं प्रांत प्रभारी पवन गोयल ने भी आयोजन में सहभागिता करते हुए ऐसे संगठनों और आयोजनों की सामाजिक व आर्थिक आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रांतीय सह सचिव प्रवीण टांक, प्रांतीय उपाध्यक्ष ज्ञान मेहता एवं रुपाली सक्सेना ने महिला इकाई को भविष्य के लिए मार्गदर्शन दिया।
मेले में भाग लेने वाले सभी विक्रेताओं को उनके सहयोग, विश्वास एवं प्रदर्शनी भावना के लिए प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। महिला इकाई अध्यक्ष अंजलि शर्मा, सचिव सुरभि बल्दवा, कोषाध्यक्ष आस्था जैन एवं मेला संयोजक राशि मुूदड़ा ने आभार जताते हुए कहा कि स्वयं सिद्धा 2025 मेले में राज्य एवं देश के विभिन्न हिस्सों से आए 70 से अधिक व्यवसायों ने सहभागिता की। यह लघु उद्योग भारती महिला इकाई का प्रथम प्रयास था, जिसने इतने विविध और व्यापक व्यापारिक मंच को सफलतापूर्वक एक साथ जोड़ा। आयोजन की सफलता से उत्साहित लघु उद्योग भारती महिला इकाई ने अगले वर्ष और भी बड़े स्वरूप में स्वयं सिद्धा के आयोजन की घोषणा करते हुए चित्तौड़गढ़ की अधिक से अधिक महिला उद्यमियों से इकाई से जुड़ने का आह्वान किया। पदाधिकारियों ने कहा कि स्वयंसिद्धा 2025 न केवल एक व्यापार मेला रहा, बल्कि यह महिला शक्ति, स्वदेशी सोच, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक प्रयास का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।