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सीधा सवाल। राशमी । सभी मान्य मतपंथो एवं धार्मिक परंपराओं में सनातन हिंदू धर्म की विवाह पद्धति सबसे विलक्षण एवं अद्भुत है ।
यह किसी प्रकार का कॉन्ट्रैक्ट या सौदा नहीं होकर सात जन्मों तक निभाया जाने वाला अटूट संबंध होता है ।
जिसमें लग्न पत्रिका लेखन से विवाह संस्कार पश्चात सती, पूर्वजों व देवताओं के धोक देने तक अनेक प्रकार की धार्मिक एवं सामाजिक परंपराओं का निर्वहन धूमधाम से किया जाता है । यह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक आधार स्तंभ भी है। उक्त विचार विश्व सनातन हिंदू धर्म रक्षा संघ के संस्थापक गौ भक्त संत राधेश्याम सुखवाल ने मरमी में आयोजित 108 सामूहिक तुलसी विवाह एवं संस्कार भागवत के अंतिम दिवस पर तुलसी सालिगराम जी का विवाह महोत्सव संपूर्ण करते हुए व्यक्त किए। सुखवाल ने कहा कि
वर्तमान समय में सनातन हिंदू संस्कार धार्मिक आयोजन एवं त्योहारों की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ते हुए चौथे स्थान पर पहुंची है ।आने वाले समय में हमारे विशाल मंदिरों, परंपराओं, त्योहारों की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की प्रथम अर्थव्यवस्था बनेगी इसमें कोई संदेह नहीं है ।
आयोजन के अवसर पर 108 तुलसी जी व सालिगराम जी का विवाह उत्सव के रूप में मनाया गया ।इस दौरान 108 जोड़ों ने यज्ञ मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी। इस अवसर पर महिलाओं ने मांगलिक गीत गाए । कार्यक्रम के पश्चात महा प्रसादी का आयोजन किया गया।विदाई रस्म के बाद सनातन हिन्दू धर्म पदयात्रा जाड़ाना के लिए प्रस्थान कर गई।जहां ग्रामवासियों द्वारा पदयात्रा का भावभिना स्वागत किया गया।