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कार्मिकों के हित की बात करने वाले संगठन भी चुप,राजनीतिक संरक्षण में चल रहा खेल
सुभाष चंद्र बैरागी
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। राज्य अथवा केंद्र की सरकार द्वारा विभिन्न संस्थाओं को आर्थिक खर्च के लिए दी जाने वाली राशि की समय-समय पर ऑडिट करवाई जाती है। जिससे कि यदि किसी भी प्रकार की आर्थिक अनियमितता हो तो उसे पहचान कर कार्रवाई करते हुए राजकोष को नुकसान की भरपाई करवाई जा सके। लेकिन क्या कहा जाए जब बंद कमरे में चल रही ऑडिट बाहर किसी संगठन की दुकान चलाने का सामान बन जाए। ऐसी हालत में ऑडिट करने वालों से लेकर करवाने वाले कार्यालय तक सभी की बदनामी होती है। और यह स्थित बन जाती है कि 'खाया पिया कुछ नही गिलास तोड़ा बारह आना'। और ऐसी ही चर्चा इन दिनों शिक्षा विभाग में जोरों पर है। जहां ऑडिट के नाम पर केश बुक लेकर पहुंचे बाबुओं से 1000 से लेकर ₹2000 तक की राशि वसूल की गई। चर्चा यह भी है कि कर्मचारियों के हित में बनाए गए एक संगठन के जिला स्तर के पदाधिकारी द्वारा यह राशि वसूल की गई। अब इस मामले में जहां राशि देने वाले बाबू सामने नहीं आ रहे हैं वही अंदरखाने यह चर्चा भी अब जोर पकड़ने लगी है कि कार्मिकों के हित के लिए बनाए गए संगठन यदि इस प्रकार वसूली करेंगे तो संगठन के नाम पर दुकान चल निकलेगी। और पूरे मामले में बड़ी बात यह भी है कि अंदरखाने इस वसूली के बारे में सभी को जानकारी है लेकिन ना तो अधिकारी और ना ही कर्मचारियों के हित का दावा करने वाले ऐसे संगठन कुछ भी बोल रहे हैं। बस केवल इधर से उधर बात कर अपना मन हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं।
एक माह पहले हुई थी 'ऑडिट'
दरअसल शिक्षा विभाग में जिला मुख्यालय सहित सभी ब्लाकों में विद्यालय चिन्हित करते हुए सालाना सिंगल नोडल अकाउंट का ऑडिट कार्यक्रम आयोजित किया गया था। चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर शहीद मेजर नटवर सिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में यह ऑडिट प्रक्रिया हुई ,वही अन्य ब्लॉकों में अलग-अलग स्थान पर इसे पूरा किया गया। जिसमें विद्यालय में साल भर में हुए वित्तीय खर्च का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए उसकी जांच की गई। और बाहर से निदेशालय स्तर पर नियुक्त किए गए पैनल ने इसकी जांच की। लगभग 5 दिन तक पूरे जिले में अलग-अलग ब्लॉक में जनवरी महीने में यह प्रक्रिया चलती रही और सिंगल नोडल अकाउंट का ऑडिट कार्य पूरा किया गया।
अंदर चलती रही ऑडिट बाहर चला रहा खेल
पूरे विभाग में अंदरखाने यह चर्चा है कि निर्धारित किए गए विद्यालयों में अंदर ऑडिट चलती रही और बाहर एक संगठन के पदभार ग्रहण के नाम पर वसूली का खेल चला रहा। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों के एक संगठन के नाम पर इस वसूली का खेल रचा गया। अब कार्मिक अंदर खाने इस वसूली को लेकर आहत है और रोष भी व्यक्त कर रहे है। अंदर खाने इस पीड़ा को संबंधित व्यक्ति द्वारा की गई वसूली के विरोध में अधिकारियों तक भी पहुंचाया गया है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है। चर्चा यह भी जिस संगठन के नाम पर वसूली की गई और जिस व्यक्ति ने यह वसूली की है वह खुद को जिले के बड़े जनप्रतिनिधियों और अन्य प्रभावशाली संगठनों के करीबी होने का दावा करता है। वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के इस व्यक्ति के प्रभाव में होने की पुष्टि इस बात से हो जाती है कि अधिकारी भले ही कार्यालय में बैठे रहे लेकिन उनके सरकारी वाहन क्या इस व्यक्ति द्वारा प्रयोग किया जाता है। अब विभाग में वसूली की चर्चा को लेकर भले ही एक दूसरे को अपना दर्द बता रहे हैं लेकिन शिकायत करने से इसलिए भी घबरा रहे हैं कि कहीं जिले से बाहर उनका तबादला ना हो जाए। पूरे मामले में विभाग में अंदर खाने चर्चाएं जोरों पर है लेकिन प्रभावित अधिकारी कोई शिकायत नहीं होने की बात कहते नजर आ रहे हैं। अब पूरे मामले में शिक्षा विभाग में चल रही ये चर्चाएं अन्य विभागों तक भी पहुंचने लगी है जो शिक्षा विभाग की किरकिरी का कारण बन रही है।
एक दुख यह भी पर बताएं किसे?
अंदर खाने कर्मचारियों को इस बात का भी दुख है कि सिंगल नोडल अकाउंट वर्चुअल राशि अकाउंट होता है। और विद्यालय में होने वाले छोटे-मोटे खर्चे इसके माध्यम से किए जाते हैं। संबंधित संस्था प्रधान और पीईईओ इसका उपयोग करने के लिए अधिकृत होते हैं। इसका ब्यौरा मंत्रालयिक कर्मचारियों के पास संधारित होता है। वही ऑडिट करवाने के लिए भी यह कर्मचारी जाते हैं। अब इसके लिए यदि इस प्रकार जेब का पैसा खर्च होने जिसका पुनर्भरण भी संभव नही है। अब अंदर खान कर्मचारी एक दूसरे को बात कर अपने मन की पीड़ा कम कर रहे हैं लेकिन ट्रांसफर का डर और ऊंचे रसूख का दम्भ भरने वाले व्यक्ति की भूमिका होने के चलते केवल एक दूसरे के आंसू पोंछ रहे हैं। मजेदार बात यह है कि मौखिक रूप से इस बात की जानकारी विभाग के जिला स्तर के उच्च अधिकारियों के पास भी अंदर खाने पहुंच चुकी है। लेकिन जूठे दम्भ और चमक दमक के बीच उलझे अधिकारी भी चुप रहने में भलाई समझ रहे हैं।
सबको सब पता फिर भी सब चुप !
जिले में कर्मचारियों के हितों से लेकर अलग-अलग विभागों के कर्मचारी संगठन बने हुए हैं। जो धरने प्रदर्शन कार्य बहिष्कार जैसी दबाव की प्रक्रियाएं समय-समय पर अपनाते रहते हैं। और शिक्षा विभाग में ऐसे संगठनों की संख्या ज्यादा है। यह मामला शिक्षा विभाग के शिक्षक क्योंकि संस्था प्रधान मूलतः शिक्षक होते हैं, के साथ-साथ बाबू यानी कि मंत्रालय कर्मचारियों से भी जुड़ा हुआ है। शिक्षकों के संगठनों की बात करें तो सरकार में दखल रखने का दावा करने वाले शिक्षक संघ राष्ट्रीय के साथ शिक्षक संघ प्रगतिशील इन दोनों से असंतुष्ट शिक्षक संघ राधाकृष्णन बड़े-बड़े संगठन सक्रिय है। वही मंत्रालय कर्मचारियों के लिए मंत्रालय कर्मचारी परिषद, मंत्रालय कर्मचारी महासंघ जैसे संगठन सक्रिय है। इन संगठनों द्वारा सरकार पर दबाव बनाने के लिए विरोध ज्ञापन प्रदर्शन किए जाते हैं वहीं अब कर्मचारियों से संगठन के नाम पर हुई वसूली को लेकर जहां चर्चा जोरों पर है वहीं सूत्रों का कहना है कि अंदर खाने पुष्टि भी हो गई है। लेकिन फिर भी कर्मचारीयो के हिमायती और हितधारक बनने वाले यह लोग चुप क्यों बैठे हैं यह भी समझ से परे है। या फिर कहीं ऐसा तो नहीं है सबकी अपनी अपनी डफली अपने-अपने रख के चक्कर में कर्मचारियों का हित कहीं पीछे छूट गया है।