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धूमधाम से निकली कलश यात्रा शुरू हुई कथा नानी बाई का मायरा
सीधा सवाल। चिकारड़ा। एक वफादार और भक्त महिला नानी बाई ने अपने परिवार को समाज के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया। सदैव दूसरों की मदद करना ही धर्म कर्म का समर्पण है। भक्ति तो भगवान की सभी करते है लेकिन नृसिंग मेहता एक इसका प्रमुख उदाहरण है । उक्त बात कथा वाचन पूजा मेनारिया ने व्यास पीठ से कहीं । इससे पूर्व नानी बाई का मायरा कथा का आरम्भ धूमधाम के निकली कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा प्रातः 10 बजे डीजे के साथ प्रजापत मोहल्ला से शुरू होकर मेंन बस स्टैंड, सांवरिया जी चौराहा पहुची जहा से पुनः रवाना होकर जाट मोहल्ला, मेंन बाजार ,नीम चौक होती हुई अग्रवाल परिसर पहुची । बीच रास्ते भर कलश लिए महिलाएं नाचती गुनगुनाती चल रही थी। वही पुरुष वर्ग ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। बग्गी में कथावाचक सु श्री पूजा मेनारिया बिराजमान थी। अग्रवाल परिसर पहुचने पर कथा आरम्भ हुई । आयोजित कथा में कथास्थल भरा भरा नजर आया। कथा स्थल पर पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। कथा के दौरान महिलाओं द्वारा बीच-बीच में नृत्य कर धर्म के प्रति आस्था को प्रोत्साहित कर रही थी। कथा वाचक सुश्री पूजा मेनारिया ने नानी बाई का मायरा कथा का मार्मिक समझते हुए बताया कि किस प्रकार नरसिंह मेहता ने नानी बाई का मायरा भरा। नरसिंह मेहता किस प्रकार हंसी के पात्र बने। यह सब कुछ होते हुए भी भगवान कृष्ण की आस्था को नहीं छोड़ा। भगवान ने भक्त की आस्था को देखते हुए धूमिल छवि को पुनः स्थापित करते हुए नानी बाई का मायरा भरा। कथा के अनुसार नानी बाई एक गरीब परिवार से थी लेकिन उनका दिल सोने जैसा था वह अपने परिवार के लिए हमेशा तैयार रहती थी और दूसरों की मदद करने में कभी पीछे नहीं हटती एक दिन उनके गांव में अकाल पड़ गया और लोग खाने के लिए तरसने लगे, नानी बाई ने अपने परिवार के लिए कुछ खाने का इंतजाम किया, लेकिन जब उन्होंने देखा कि उनके पड़ोसी और अन्य लोग भी भूखे तो उन्होंने अपना खाना उन्हें दे दिया। नानी बाई की वफादारी दया और आत्म त्याग की भावना को भगवान कृष्ण को भी हिला दिया। कथा का महत्व और माध्यम यही कहता है कि दूसरों की मदद करना और अपने परिवार के लिए समर्पित रहना कितना महत्वपूर्ण होता हैकथा श्रवण करने में कस्बे सहित आसपास क्षेत्र के सैकड़ो ग्रामीण महिला पुरुष उपस्थित थे। इस कथा को लेकर आयोजको द्वारा पिछले एक सप्ताह से किए जा रहे व्यवस्थाओं का विराम लगा। कथा के लिए टेंट कालीन लगाए गए । पेयजल की व्यवस्थाएं की गई।