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संयम चपलोत
सफलता तीन चीजो से मापी जा सकती है, धन, प्रसिद्धि और मन की शांति। धन और प्रसिद्धि पाना आसान है परंतु, मन की शांति केवल योग से मिलती है।
आज पूरा विश्व 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने जा रहा है, जैसा कि हम जानते हैं योग का इतिहास काफी सालों पुराना है, परंतु शायद हम इस राह से भटक चुके थे, योग के महत्व को कम करते चले गए थे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग दिवस की पहल की, इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 192 देशों के साथ 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की सहमति प्रकट की। तभी से लेकर आज तक प्रत्येक 21 जून को योग दिवस मनाया जा रहा है। हमारे देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लागू करने में व इसको सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप सबसे अधिक संख्या में एक बार में एक साथ व्यक्तियों के योग करने का रिकॉर्ड भारत ने बनाया व इसी के साथ भारत ने विश्व रिकॉर्ड बना कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में अपना नाम दर्ज किया। 21 जून वर्ष का सबसे बड़ा दिन होता है और योग भी मनुष्य की आयु को बढ़ाता है, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाने लगा।
योग व्यायाम का ऐसा प्रभावशाली रूप है जिस माध्यम से ना केवल शरीर के अंगों, बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा मैं संतुलन बनाया जा सके, यही कारण है कि योग से शारीरिक परेशानी के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी दूर होती है।
योग के आसन, प्राणायाम, कपालभाति, अनुलोम- विलोम, भ्रामरी आदि कई प्रकार है। योग करने से कई छोटी से लेकर गम्भीर बीमारियों से भी निजात पाया जा सकता है।
आज हमारे देश में भी कई संस्थाएं हैं जो योग को पुनः दिनचर्या में लाने के लिए प्रयासरत है। देश विदेश के चिकित्सक भी मानते है जो बीमारी दवाई से ठीक नहीं हो सकती है वह बीमारी योग करने से समाप्त हो सकती है। आज योग के लिए सरकारों ने विद्यालयों में भी अलग से कक्षाएं संचालित करने के लिए कह रखा है, हमारे प्राचीन ऋषि -मुनियों ने भी इसे अपनाकर अपना जीवन सफल बनाया था। योग का इतिहास 5000 वर्ष पुराना है, हमारे देश मे सबसे प्राचीन व्यक्ति पतंजलि ने योग की स्थापना कि थी, वर्तमान में देश मे स्वामी रामदेव का भी योग गुरु के रूप में अहम योगदान है, इन्होंने भी देश विदेश मे योग के प्रचार के लिए कोई कमी नही रखी, इन्ही सभी प्रयासों के फलस्वरूप आज पुनः देश विदेश में योग का महत्व बढ़ा है। हम सभी को भी अधिक से अधिक व्यक्तियों को योग के लिए प्रेरित करना होगा, तभी जाकर हमारा योग दिवस मनाना सफल होगा व इसको जीवन चर्या का अभिन्न अंग बनाना होगा।