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मानवेंद्र सिंह चौहान
सम्पादक
......जिले और उदयपुर संभाग में लगातार पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां कार्रवाई कर अवैध हथियार बरामद कर रही है। वहीं सोशल मीडिया पर भी अवैध हथियारों के साथ युवा वर्ग अपनी फोटो और वीडियो डालकर गाहे-बगाहे चर्चाओं में रहता है। लेकिन अवैध हथियार पकड़े जाने का यह सिलसिला कोई सुखद संकेत नहीं है। क्योंकि जिस तादाद में हथियार पकड़े जा रहे हैं वह एक बड़ी अनहोनी की ओर इशारा कर रहा है। दरअसल अवैध हथियारों के मामले में जितने भी खुलासे हो रहे हैं उनमें 19 से लेकर 25 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं की तादाद है जिनसे हथियार बरामद किए जा रहे हैं। निश्चय ही पुलिस की कार्यवाही प्रशंसनीय है जो अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान चलाकर इस बात का प्रयास कर रही है कि सामाजिक सुरक्षा में किसी भी प्रकार की सेंधमारी नहीं हो सके। पुलिस की कार्यवाही अपनी जगह है लेकिन अवैध हथियारों के जखीरे की बरामदगी के बाद जो तस्वीर बन रही है वह एक सवाल खड़ा कर रही है कि यह तरुणाई किस ओर अग्रसर है?
लगातार सोशल मीडिया पर अवैध हथियारों के साथ फोटो और वीडियो अपलोड करना महज एक स्टेटस सिंबल है या फिर किसी आशंका का भय है जो युवा पीढ़ी को अवैध हथियारों की तरफ आकर्षित कर रहा है। यदि यह एक स्टेटस सिंबल है तो यह अत्यंत विचारणीय बिंदु है क्योंकि सोशल मीडिया के इस दौर में जहां अफवाह आग की तरह फैलती है ऐसे दौर में स्टेटस सिंबल का प्रतीक बने यह अवैध हथियार सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की बड़ी पहल हो सकते है। क्योंकि जिस तरह युवा वर्ग अवैध हथियारों की तरफ आकर्षित हो रहा है उसी अनुपात में आपराधिक और हिंसक घटनाओं की तादाद भी लगातार बढ़ रही है। बेरोजगारी और मामूली कहासुनी के चलते युवा वर्ग के कब्जे में यह हथियार कभी भी खूनी संघर्ष का कारण बन सकते हैं इस बात की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन यदि यह तरुणाई किसी सामाजिक सुरक्षा के भय के कारण अवैध हथियारों की ओर अग्रसर हो रही है तो यह और भी अधिक गंभीर बात है। जिस तरह सोशल मीडिया पर कट्टरवादी भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए कतिपय लोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति हेतु अभियान छेड़े हुए हैं। ऐसे में इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि डिजिटल मीडिया के इस दौर में युवा वर्ग के मन में यह संभावना घर नहीं कर रही है कि समाज सामाजिक विघटन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। और इन परिस्थितियों में यह चिंतन आवश्यक हो जाता है कि आखिर ऐसा कारण क्या है जिसके चलते यह युवा वर्ग और विशिष्ट आयु वर्ग के युवा इन अवैध हथियारों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। यहां बात वर्ग, समुदाय, धर्म, संप्रदाय की ना होकर पूरे युवा वर्ग की है जो देश का भविष्य है। क्योंकि यदि भावनाओं में बहकर युवा कोई गलत कदम उठा लेता है तो उसका परिणाम पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। आपराधिक समाज की चकाचौंध भी युवा वर्ग को इस ओर आकर्षित कर रही है इस बात की संभावना से भी कतई इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में समाज के अग्रणी और वरिष्ठजनों को अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए समाज के मार्गदर्शक बन तरुणाई को इस दिशा में जाने से रोकने के लिए पहल करनी होगी। क्योंकि यदि इन परिस्थितियों को अभी से नियंत्रित नहीं किया गया तो हालात और अधिक वीभत्स होंगे इस बात की पूरी संभावना है। संभावना और आशंकाओं को जड़ मूल से नष्ट करना अत्यधिक आवश्यक है जिससे समाज के ताने-बाने और देश की रीड कहीं जाने वाली युवा पीढ़ी को ऐसी दिशा में जाने से रोका जा सके जहां उनका भविष्य पूरी तरह से अंधकार में है और हम सबको मिलकर इस बात के लिए सामूहिक पहल करनी होगी, मंथन और चिंतन करना होगा, जिससे कि स्टेटस सिंबल और असुरक्षा का भय दोनों ही एक साथ खत्म हो सके और अनिष्ट की आशंका की ओर बढ़ रहे युवा वर्ग को देश का उज्जवल भविष्य बनाने की दिशा में प्रयास किया जा सके।