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सीधा सवाल। चित्तौडग़ढ़। विशेष न्यायालय लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के न्यायाधीश अमित सहलोत ने चार वर्ष पुराने नाबालिग बालिका के अपहरण व दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को दोषी मानते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास व 30 हजार रुपए के अर्थदंड सुनाया है। विशेष लोक अभियोजक अफजल मोहम्मद शेख ने बताया कि बड़ीसादड़ी क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने उपाधीक्षक को एक रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया कि 13 जनवरी 2020 को उनके गांव में एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए किशन सिंह पुत्र कालू रावत आया था। इस कार्यक्रम में प्रार्थी की नाबालिक पुत्री भी गई थी। कार्यक्रम के बाद पुत्री रजका लेने के खेत पर गई थी, जहां से किशन सिंह उसे बहला फुसला कर भगा ले गया। उसके घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन पता नहीं लगा। घटना के चार दिन बाद किशनसिंह के फोन से उसके पुत्र के मोबाइल पर फोन आया। इसमें उसकी पुत्री ने रोते हुए किशन सिंह द्वारा उसे मुम्बई ले जाकर बंधक बनाने की जानकारी दी। इसके बाद 20 जनवरी को भी उसके भाणेज के मोबाइल पर भी उसकी पुत्री ने फोन पर स्वयं के मुम्बई में बंधक होने की जानकारी दी। इस पर पुलिस ने कार्यवाही करते हुए पीडिता को दस्तयाब कर अभियुक्त को गिरफ्तार किया। पुलिस ने प्रकरण का अनुसंधान पूर्ण कर इसके विरुद्ध न्यायालय में चालान पेश किया। प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 15 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 34 विभिन्न दस्तावेज प्रस्तुत किए। मामले में न्यायाधीश ने अभियुक्त किशनसिंह को दोषी मानते हुए धारा 363 के तहत 7 साल का कठोर कारावास व 5 हजार जुर्माना, धारा 366 के तहत 7 साल का कठोर कारावास व 5 हजार जुर्माना तथा पोक्सो एक्ट की धारा 3/4 (2) के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार के जुर्माने की सजा से दंडित किया। न्यायालय ने पीड़ित को राजस्थान राज्य पीड़ित प्रतिकर येाजना के तहत 4 लाख रुपए की प्रतिकर राशि दिलाए जाने के भी आदेश दिए हैं।