चित्तौड़गढ़ - जिले में पनप रहा बीमारी की कमाई का कैंसर,बीमार लोगो के नाम पर लाखों की इंश्योरेंस पॉलिसी करवाने वाला गिरोह सक्रिय
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चिकित्सकों के फर्जी सर्टिफिकेट और जनप्रतिनिधियो के प्रमाण पत्र के आधार पर भुगतान

सुभाष चंद्र बैरागी 
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़।
कैंसर एक ऐसी बीमारी जिसका नाम सुनते ही परिवार में दुख और भय का माहौल पैदा हो जाता है। प्राथमिक स्टेज पर अगर कैंसर हो तो उपचार संभव है लेकिन तीसरी और चौथी स्टेज पर कैंसर का यह रोग केवल जानलेवा साबित होता है। लेकिन कैंसर का यही जानलेवा रोग अब कमाई का जरिया बन चुका है। जिले में ऐसा गिरोह सक्रिय है जिसके लिए कैंसर लाखों नहीं बल्कि करोड़ों की कमाई का जरिया है। और इस खेल में चिकित्सक से लेकर पुलिस और निचले स्तर के जनप्रतिनिधि भी कई बार अनजाने में तो कई बार जानबूझकर इस गिरोह का सहयोग कर रहे हैं। एक और जहां इस खेल से इंश्योरेंस कंपनियों के साथ धोखाधड़ी हो रही है वहीं दूसरी ओर सही मायने में लाभ लेने वाले लाभार्थी भी इन इंश्योरेंस कंपनियों के शक दायरे में आ जाते हैं। जिसका नुकसान यह होता है कि योग्य लाभार्थी को भी लाभ लेने के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं जबकि उसकी कोई गलती नहीं होती है। गिरोह इतने सुनियोजित तरीके से षड्यंत्र को अंजाम देता है कि कड़ी मेहनत के बाद इंश्योरेंस कंपनी से जुड़े लोग इस फर्जीवाड़े को पकड़ पाते है। लेकिन कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए केवल क्लेम का भुगतान नहीं करने के अतिरिक्त कंपनियां भी कोई कार्रवाई नहीं करती है जिसका नतीजा है कि यह गिरोह जिले में तेजी से पनप रहा है।

भदेसर कपासन और राशमी गिरोह का गढ़

फर्जी इंश्योरेंस क्लेम और कैंसर रोगियों के नाम पर वाहन फाइनेंस करवाने वाले गिरोह की सर्वाधिक सक्रियता जिले के भदेसर कपासन और राशमी क्षेत्र में है। सीधा सवाल की पड़ताल में ऐसे मामले सामने आए हैं जिन में रोगी कैंसर का था और चौथी स्टेज का कैंसर होने के बाद उसे अस्पताल से भी भेज दिया गया लेकिन उसके बावजूद उसकी मृत्यु खेत पर करंट लगने से बता दी गई। पुलिस और चिकित्सक ने भी इस शिकायत को प्रमाणित कर दिया लेकिन जब इंश्योरेंस कंपनी को शक हुआ और दस्तावेज निकले तो पता लगा कि मृतक मस्तिष्क के कैंसर का शिकार था जो बिस्तर से उठ भी नहीं सकता है। ऐसी स्थिति में उसके कारण से हुई मौत को लेकर लगभग 1 करोड रुपए का इंश्योरेंस क्लेम खारिज कर दिया गया लेकिन अब तक इस मामले में कोई प्राथमिकी ही दर्ज नहीं हुई है। वही कपासन क्षेत्र के मामले में मृतक कैंसर का मरीज था जो लंबे समय से उपचार ले रहा था लेकिन उसकी शारीरिक स्थिति खराब होने के बावजूद नीम के पेड़ से गिरने से मौत बताते हुए एक्सीडेंटल डेथ के क्लेम के दस्तावेज तैयार किए गए इस प्रकरण में सरपंच आंगनवाड़ी और पुलिस के साथ-साथ चिकित्सालय से भी नीम के पेड़ से गिरने की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और इसके आधार पर क्लेम फाइल कर दिया गया। इस मामले में अनौपचारिक रूप से एक जनप्रतिनिधि ने स्वीकार भी किया है मृतक के बारे में ग्राम पंचायत द्वारा गलत सत्यापन किया गया है जिसकी रिकॉर्डिंग मौजूद है। वही राशमी क्षेत्र में अब तक ऐसे मामलों में करोड़ों का क्लेम उठाया जा चुका है।

वाहन भी करवा लेते है फाइनेंस

इस गिरोह से जुड़े लोग न केवल कैंसर रोगी का बीमा करवाते हैं बल्कि उसके नाम पर ट्रक लग्जरी वाहन और ट्रैक्टर तक उठा लेते हैं और ऐसी स्थिति में उठते हैं कि जब रोगी की मृत्यु निकट होती है ऐसी स्थिति में छोटा सा डाउन पेमेंट देकर महंगा वहां हथिया लेते हैं और क्योंकि मृतक के नाम पर फाइनेंस होने से चाहे सरकारी हो या निजी कंपनी अपने पैसे का क्लेम नहीं कर सकती इसलिए कौड़ियों के दाम में लाखों रुपए के वाहन इस गिरोह के हाथ लग जाते है। जिनकी एनओसी प्राप्त कर इन वाहनों को मोटी कीमत पर फिर से बेच दिया जाता है। कपासन क्षेत्र में हुआ मामले में मृतक के नाम पर जहां लगभग 50 लाख का एक्सीडेंटल डेथ इंश्योरेंस है वही उसके नाम पर एक ट्रक और एक ट्रैक्टर भी फाइनेंस करवाया गया है लेकिन मोके पर स्थिति ऐसी है कि परिवार के पास ना तो ट्रैक्टर है ना ट्रक है। उल्टे परिवार के पास उनके परिवार के मृतक सदस्य के दस्तावेज तक नहीं है।


दस्तावेजों में भी होता है फर्जीवाड़ा, जनप्रतिनिधि करते हैं प्रमाणित

इस मामले में पुलिस रिपोर्ट चिकित्सक प्रमाण पत्र और जन प्रतिनिधियों की सत्यापन रिपोर्ट आवश्यक होती है। लेकिन ऐसे सभी मामलों में यह सभी रिपोर्ट है गलत होती है। जो या तो गिरोह प्रभाव में अथवा सहानुभूतिवश रिपोर्ट जारी कर देते हैं जो भुगतान लेने के लिए काम आती है। लेकिन अधिकांश मामलों में ऐसी रिपोर्ट जारी करने के लिए गिरोह के सदस्य मोटा लेनदेन करते हैं जिससे यदि भविष्य में कोई जांच पड़ताल की जाए तो वह अपनी रिपोर्ट पर कायम रहे और भुगतान उठाने में इसी तरह की समस्या सामने नहीं आए।

कागजों में बदल जाती है पहचान

सरकार ने किसी भी तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आधार कार्ड की व्यवस्था की है लेकिन आधार कार्ड के बदलाव के नियमों का फायदा उठाकर कभी नाम में एक अक्षर कम या ज्यादा कर मृतक के मूल दस्तावेज तक बदल दिए जाते हैं जिन्हें जनप्रतिनिधि सत्यापित कर देते हैं ऐसे में इस तरह के फर्जी भुगतान के मामलों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। और कैंसर का यह रोग जो जानलेवा है करोड़ों की कमाई का जरिया बना हुआ है।


पहले पिता पुत्र ने कर दी थी क्लेम के लिए हत्या

ऐसे ही एक मामले में भदेसर थाना क्षेत्र में जब सड़क हादसे का खुलासा हुआ तो पता लगा कि मृतक सड़क हादसे में नहीं मरा बल्कि उसी के पिता और भाई ने मृतक के नाम पर वहां फाइनेंस करने के बाद वाहन पर कब्जा करने के लिए उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने दोनों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार भी किया था। ऐसे में इंश्योरेंस का एक खेल मोटी कमाई के लालच में अपराध और अपराधियों को भी बढ़ावा दे रहा है।

गिरोह कमाता है मोटी राशि, परिजनों को मिलती है चिल्लर

इंश्योरेंस और फर्जीवाड़े के खेल में इस पूरे नेक्सस को चलाने वाले लोग मोटी राशि कमाते हैं वहीं परिजनों को केवल छोटी मोटी राशि मिलती है क्योंकि इंश्योरेंस की कार्रवाई पूरी करने के दौरान यह नए खातों का प्रयोग करते हैं या फिर इन मृतक के खाता अथवा परिजन के खाते का सारा डाटा और एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते हैं। जिससे क्लेम की राशि का एक मोटा हिस्सा इनके पास होता है और थोड़ा बहुत पैसा देकर घरवालों को चुप करवा दिया जाता है। बड़ी बात यह भी है कि ऐसे गिरोह के शिकार ग्रामीण क्षेत्र अथवा कम पढ़े-लिखे लोग होते हैं जिससे कि उनको भीम की जानकारी नहीं हो पाए और गिरोह का काम पर बदस्तूर चलता रहे।

जिला मुख्यालय पर बाकायदा ऑफिस चला कर कर रहे फर्जीवाड़ा

जिला मुख्यालय पर फाइनेंस एडवाइजरी के नाम से ऐसे ऑफिस चला कर कम सिबिल स्कोर को सुधारना, दस्तावेजो में फेरबदल करना जैसे काम किये जा रहे हैं। सूत्रों का यहां तक कहना है कि जिला मुख्यालय का किदवई नगर क्षेत्र का कार्यालय इस गिरोह का मुख्य अड्डा है। जिसका कर्ताधर्ता ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा एक पोस्ट ऑफिस का कार्मिक है जो इन सारे कारनामों को अंजाम दे रहा है। क्योंकि पोस्ट ऑफिस के पास आधार केंद्र और आधार में संशोधन के अधिकार हैं इसलिए यह सारा काम आसानी से हो जाता है। फर्जी इंश्योरेंस फर्जी वाहन फाइनेंस और कैंसर रोगियों को मोहरा बनाने का काम किया जाता है।

बांसवाड़ा में हुआ था खुलासा, कपासन में भी दर्ज हुई थी प्राथमिकी

कुछ समय पूर्व बांसवाड़ा क्षेत्र में वर्तमान में कपासन में पदस्थ पुलिस उपाधीक्षक हरजीराम यादव के नेतृत्व में ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा हुआ था जो इस तरह के फर्जीवाड़े को अंजाम देता था। और गिरोह के सदस्यों को उनके अंजाम तक पहुंचने में यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। वही ऐसे ही एक मामले में कपासन क्षेत्र में कंपनी की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए एजेंट को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। एसएमएस साफ है कि यदि कार्रवाई होती है तो जिले से बड़े गिरोह का खुलासा होगा जो सरकारी और निजी इंश्योरेंस कंपनियों को चूना लगाने के साथ-साथ मृत्यु के नाम पर उनके परिजनों को चिल्लर देकर मोटा मुनाफा कमा रहा है।



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