चित्तौड़गढ़ - विधायक आक्या ने तकनीकी शिक्षा विभाग में अनियमित पदोन्नति पर उठाया सवाल, कार्रवाई की मांग
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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने सोमवार को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत नियम 131 पर बोलते हुए सदन में कहा की तकनीकी शिक्षा विभाग में अजमेर जिले के मालपुरा राजकीय महिला इंजीनियरिंग काॅलेज में एक उप कूल सचिव और तीन सहायक कुल सचिवो को पे-रेक्टिफिकेशन की आढ़ में नियम विरू़द्ध पदोन्नति प्रदान की गई। इसमें अनेक अनियमितताएं दृष्टिगत हुई है।
विधायक आक्या ने सदन में कहा की उक्त कार्मिकों की नियुक्ति की पत्रावली तक उपलब्ध नहीं है एवं जारी किए गए पे-रेक्टिफिकेशन के आदेश एवं अन्य संबंधित दस्तावेज अभिलेख पर उपलब्ध नहीं है। उपरोक्त चारों कार्मिकों से पूर्व नियुक्त कार्मिकों को पदोन्नति प्रक्रिया में सम्मिलित न करते हुए कनिष्ठ कार्मिकों को पदोन्नति प्रदान की गयी है। उन्होने कहा की ये सभी कार्मिक कहां कार्य कर रहे हैं, यह भी स्पष्ट नहीं है। एक कार्मिक शिवपाल यादव नियुक्ति के स्थान पर कार्य न कर हमेशा प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत रहे हैं। प्रकरण में इन कार्मिकों के पे-रेक्टिफिकेशन के आदेश जारी करने के प्रयास किए जा रहे है। उक्त चार अशैक्षणिक कार्मिकों को पे-रेक्टिफिकेशन का लाभ देने पर शेष अशैक्षणिक कार्मिकों द्वारा विरोध किया गया। प्रकरण में गृह मंत्रालय द्वारा दखल देने पर तकनीकी शिक्षा विभाग ने जांच कमेटी का गठन किया है किन्तु तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा गठित की गयी कमेटी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट पर कोई अग्रेत्तर कार्यवाही नहीं हुई है। इसके विपरीत उसके उपर नई जांच कमेटी का गठन किया जा रहा है।
विधायक आक्या ने उक्त ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सदन में सरकार से नियम विरूद्ध पे- रेक्टिफिकेशन का लाभ देने संबंधी प्रकरण व चारों कार्मिकों की नियुक्ति की त्वरित जांच कराने के साथ ही जारी किए गए पे-रेक्टिफिकेशन के आदेश को निरस्त किए जाने के साथ ही संबंधित दोषी अधिकारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही करते हुए की गयी कार्यवाही से सदन को अवगत कराने की मांग की।
इस पर उप मुख्यमंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने सदन में जवाब देते हुए उक्त प्रकरण में चयन संदिग्ध होकर शिकायत सही पाये जाने तथा चयन की पत्रावली गायब होने की बात स्वीकार की। उन्होंने सरकार द्वारा इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने व नवीन जांच कमेटी का गठन किये जाने तथा कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्यवाही किये जाने की बात सदन में कही।
उप मुख्यमंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा के जवाब से असंतुष्ट विधायक आक्या ने सदन में पुरक प्रश्न पुछते हुए कहा की इस प्रकरण में पुरानी जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार द्वारा कार्यवाही क्यो नही की गई तथा नवीन जांच कमेटी का गठन किये जाने की आवश्यकता क्यो पड़ी ? 2024 के इस प्रकरण पर सरकार द्वारा अभी तक कार्यवाही क्यो नही की गई है ? एक कार्मिक शिवपाल यादव की भर्ती 2008 में हुई थी उसकी चयन पत्रावली गायब कैसे हुई, वर्तमान में उसका पदस्थापन कहां पर है तथा उसे वेतन कहां से मिल रहा है ? शिवपाल यादव अपनी सेवा अवधि में 90 फिसदी डेपुटेशन पर रहा है तथा अन्य वरिष्ठ कार्मिको की वरिष्ठता को छोड़ते हुए शिवपाल यादव को पदोन्नती किस प्रकार दी गई तथा शिवपाल यादव की वर्ष 2025 जनवरी, फरवरी व मार्च में लगातार 3 माह तक वेतन किस आधार पर बढाया गया ?
विधायक आक्या ने सदन में उप मुख्यमंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा द्वारा उक्त प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा की सरकार चाहे तो एक ही दिन में दोषी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकती है। उन्होने पूरानी जांच कमेटी की रिपोर्ट को सदन में रखने की बात करते हुए कहा की विभिन्न समाचार पत्रो ने अनेको बार इस प्रकरण को अपने समाचार पत्रो में प्रमुखता से छापा है तथा सूचना के अधिकार के तहत भी अनेक लोगो द्वारा जांच रिपोर्ट की छाया प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई लेकिन सरकार रिपोर्ट को सार्वजनिक नही कर रही है तथा नवीन जांच कमेटी गठित करने की बात कही जा रही है। विधायक आक्या ने इस प्रकरण में एसओजी से जांच कराने की मांग की।
विधायक आक्या द्वारा उठाये गये इस गंभीर मुददे का समर्थन करते हूए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उप मुख्यमंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा से निश्चित समायावधि में कार्यवाही कर रिपोर्ट सदन में रखने के निर्देश दिये।
विधायक आक्या ने उक्त ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सदन में सरकार से नियम विरूद्ध पे- रेक्टिफिकेशन का लाभ देने संबंधी प्रकरण व चारों कार्मिकों की नियुक्ति की त्वरित जांच कराने के साथ ही जारी किए गए पे-रेक्टिफिकेशन के आदेश को निरस्त किए जाने के साथ ही संबंधित दोषी अधिकारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही करते हुए की गयी कार्यवाही से सदन को अवगत कराने की मांग की।
इस पर उप मुख्यमंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने सदन में जवाब देते हुए उक्त प्रकरण में चयन संदिग्ध होकर शिकायत सही पाये जाने तथा चयन की पत्रावली गायब होने की बात स्वीकार की। उन्होंने सरकार द्वारा इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने व नवीन जांच कमेटी का गठन किये जाने तथा कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्यवाही किये जाने की बात सदन में कही।
उप मुख्यमंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा के जवाब से असंतुष्ट विधायक आक्या ने सदन में पुरक प्रश्न पुछते हुए कहा की इस प्रकरण में पुरानी जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार द्वारा कार्यवाही क्यो नही की गई तथा नवीन जांच कमेटी का गठन किये जाने की आवश्यकता क्यो पड़ी ? 2024 के इस प्रकरण पर सरकार द्वारा अभी तक कार्यवाही क्यो नही की गई है ? एक कार्मिक शिवपाल यादव की भर्ती 2008 में हुई थी उसकी चयन पत्रावली गायब कैसे हुई, वर्तमान में उसका पदस्थापन कहां पर है तथा उसे वेतन कहां से मिल रहा है ? शिवपाल यादव अपनी सेवा अवधि में 90 फिसदी डेपुटेशन पर रहा है तथा अन्य वरिष्ठ कार्मिको की वरिष्ठता को छोड़ते हुए शिवपाल यादव को पदोन्नती किस प्रकार दी गई तथा शिवपाल यादव की वर्ष 2025 जनवरी, फरवरी व मार्च में लगातार 3 माह तक वेतन किस आधार पर बढाया गया ?
विधायक आक्या ने सदन में उप मुख्यमंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा द्वारा उक्त प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा की सरकार चाहे तो एक ही दिन में दोषी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकती है। उन्होने पूरानी जांच कमेटी की रिपोर्ट को सदन में रखने की बात करते हुए कहा की विभिन्न समाचार पत्रो ने अनेको बार इस प्रकरण को अपने समाचार पत्रो में प्रमुखता से छापा है तथा सूचना के अधिकार के तहत भी अनेक लोगो द्वारा जांच रिपोर्ट की छाया प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई लेकिन सरकार रिपोर्ट को सार्वजनिक नही कर रही है तथा नवीन जांच कमेटी गठित करने की बात कही जा रही है। विधायक आक्या ने इस प्रकरण में एसओजी से जांच कराने की मांग की।
विधायक आक्या द्वारा उठाये गये इस गंभीर मुददे का समर्थन करते हूए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उप मुख्यमंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा से निश्चित समायावधि में कार्यवाही कर रिपोर्ट सदन में रखने के निर्देश दिये।