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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। हिन्दू धर्म में मां दुर्गा के नव स्वरूपों की पूजा-अर्चना में चैत्र और आश्विन माह सहित गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है । प्रतिवर्ष हिन्दू पंचाग के आधार पर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक चैत्र नवरात्रि मनायी जाती है । मान्यता है कि नवरात्रि का व्रत रखने और माता की अराधना से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है । सामान्यतः आंग्ल कैलेंडर के आधार पर अप्रैल के माह में चैत्र नवरात्रि प्रारम्भ होती है, किन्तु इस बार मार्च माह के अंत में ही चैत्र नवरात्रि स्थापना देखने को मिल रही है ।
हिन्दू पंचांग के आधार पर ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय गील ने बताया की इस बार नवसंवत्सर 2082 में चैत्र माह की नवरात्रि रविवार,30 मार्च 2025 से प्रारंभ होकर सोमवार ,7 अप्रैल तक रहेगी । ज्योतिषीय गणना के आधार पर तृतीया तिथि को विलोपित बताया गया है । इस प्रकार शुक्रवार,4 अप्रैल को सप्तमी और शनिवार, 5 अप्रैल 2025 को दुर्गा अष्टमी यानी महाष्टमी रहेगी । साथ ही नवरात्री व्रत एवं नवदुर्गा के स्वरूपों की पूजा रविवार, 6 अप्रैल रामनवमी के दिन तक ही की जा सकेगी । मान्यताओं के आधार पर नवरात्रि का पारण सोमवार, 07 अप्रैल को किया जा सकेगा ।
*कलश स्थापना शुभ मुहूर्त*
हिन्दू पंचाग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया की इस बार चैत्र नवरात्रि में रवि- इंद्र , सर्वार्थ सिद्धि ,बुधादित्य एवं शिववास योग और रेवती नक्षत्र के अद्भुत संयोग में माँ नवदुर्गा हाथी पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर आगमन करेगी, जिसे राष्ट्र एवं भक्तो के लिए कल्याणकारी माना जा रहा है । उदया तिथि के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार 30 मार्च को है अतः इसी दिन घट स्थापना होगी।
घटस्थापना मुहूर्त-
प्रात: 06:13 से 10:22 तक ।
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:11 से 01 :01 तक ।
चोघडीया मुहूर्त –
लाभ अमृत काल -प्रातः 09 :31 से 12 :36 तक
शुभ काल - दोपहर 02:08 से 03 :41 तक
शुभ -अमृत काल -सायं 06 :46 से रात्रि 09 :41 तक
नौ स्वरूपों की होगी पूजा
• 30 मार्च- नवरात्रि प्रतिपदा- मां शैलपुत्री की पूजा और घट स्थापना
• 31 मार्च- नवरात्रि द्वितीया- मा ब्रह्मचारिणी की पूजा और तृतीया - मां चंद्रघंटा की पूजा
• 01 अप्रैल- नवरात्रि चतुर्थी- मां कुशमंडा की पूजा
• 02 अप्रैल- नवरात्रि पंचमी- मां स्कंदमाता की पूजा
• 03 अप्रैल- नवरात्रि शष्ठी- मां कात्यायनी की पूजा
• 04 अप्रैल- नवरात्रि सप्तमी- मां कालरात्रि की पूजा
• 05 अप्रैल- नवरात्रि अष्टमी- मां महागौरी की पूजा
• 06 अप्रैल- नवरात्रि नवमी- मां सिद्धिदात्री की पूजा, राम नवमी
• 07 अप्रैल - नवरात्रि पारण