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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। प्रदेश में विद्युत उत्पादन, प्रसारण एवं वितरण निगमों में निजीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति के विरोध में संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा संपूर्ण राजस्थान में विरोध जताया जा रहा है। इसी क्रम में चित्तौड़गढ़ में कर्मचारियों और अधिकारियों ने राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर निजीकरण और ठेका प्रथा को बंद करने की मांग की।
ज्ञापन में HAM मॉडल के तहत 33/11 केवी ग्रिड के फीडर सेग्रिगेशन और सोलराईजेशन को आउटसोर्स किए जाने पर आपत्ति जताई गई। कर्मचारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया ग्रिड सेफ्टी कोड का उल्लंघन है और इससे देश की सामरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है, विशेष रूप से किसी आंदोलन, प्रदर्शन या युद्ध के समय।
संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और विद्युत प्रशासन ने कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया और निजीकरण की प्रक्रिया को रोका नहीं गया, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ (BMS), प्रांतीय विद्युत मंडल मजदूर फेडरेशन (INTUC), पावर इंजीनियरिंग एसोसिएट राजस्थान (PEARS) और राजस्थान विद्युत तकनीकी कर्मचारी एसोसिएशन (RVTKA) के पदाधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे। प्रमुख रूप से विमलचंद जैन, सीताराम जाट, चेतन प्रकाश शर्मा, जाकिर मंसूरी, नरेश सिंह भाटी, नारायण कुमावत, योगेश सुखवाल, कैलाश जी, सिधांत शर्मा, प्रमोद कुमार व्यास, मंगल सिंह और विनायक उपाध्याय उपस्थित रहे।
संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की कि HAM मॉडल के तहत किए जा रहे निजीकरण को अविलंब रोका जाए, अन्यथा बड़े आंदोलन की जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
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ChatGPT says: **चित्तौड़गढ़: विद्युत क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का ज्ञापन, बड़े आंदोलन की चेतावनी** चित्तौड़गढ़। प्रदेश में विद्युत उत्पादन, प्रसारण एवं वितरण निगमों में निजीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति के विरोध में संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा संपूर्ण राजस्थान में विरोध जताया जा रहा है। इसी क्रम में चित्तौड़गढ़ में कर्मचारियों और अधिकारियों ने राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर निजीकरण और ठेका प्रथा को बंद करने की मांग की। ज्ञापन में HAM मॉडल के तहत 33/11 केवी ग्रिड के फीडर सेग्रिगेशन और सोलराईजेशन को आउटसोर्स किए जाने पर आपत्ति जताई गई। कर्मचारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया ग्रिड सेफ्टी कोड का उल्लंघन है और इससे देश की सामरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है, विशेष रूप से किसी आंदोलन, प्रदर्शन या युद्ध के समय। संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और विद्युत प्रशासन ने कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया और निजीकरण की प्रक्रिया को रोका नहीं गया, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने वालों में ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ (BMS), प्रांतीय विद्युत मंडल मजदूर फेडरेशन (INTUC), पावर इंजीनियरिंग एसोसिएट राजस्थान (PEARS) और राजस्थान विद्युत तकनीकी कर्मचारी एसोसिएशन (RVTKA) के पदाधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे। प्रमुख रूप से विमलचंद जैन, सीताराम जाट, चेतन प्रकाश शर्मा, जाकिर मंसूरी, नरेश सिंह भाटी, नारायण कुमावत, योगेश सुखवाल, कैलाश जी, सिधांत शर्मा, प्रमोद कुमार व्यास, मंगल सिंह और विनायक उपाध्याय उपस्थित रहे। संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की कि HAM मॉडल के तहत किए जा रहे निजीकरण को अविलंब रोका जाए, अन्यथा बड़े आंदोलन की जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।