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सीधा सवाल की खबर का असर,लॉटरी के जरिये कृषि भूमि को बेचने का मामला
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। जिला मुख्यालय के उपनगरीय क्षेत्र चंदेरिया में यूआईटी पेराफेरी क्षेत्र में बिना स्वीकृति के कृषि भूमि को कॉलोनी के रूप में बिना स्वीकृति के लॉटरी के माध्यम से बेचे जाने के मामले में अब जांच शुरू हो गई है। जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने मामले में जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद यूआईटी की टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण करते हुए जांच शुरू कर दी है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है की जल्द ही इस पूरे मामले में कार्रवाई होगी। लेकिन खुद की जमीन का लॉटरी के माध्यम से लालच दिखाकर अपने आशियाने का सपना देखने वाले लोगों के साथ हुई धोखाधड़ी के इस मामले में इस पूरे कारनामे को अंजाम देने वाले दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई कब होगी यह भी एक बड़ा सवाल है। उल्लेखनीय है, कि चंदेरिया क्षेत्र में भेरडा रोड पर कृषि भूमि को अधिकार हस्तांतरण की बंटवारे की रजिस्ट्री के माध्यम से कॉलोनी बता कर 450 से अधिक भूखंडों की अवैध कॉलोनी चंद्र नगर के नाम से काटी गई, और 75% से अधिक भूखंड बेच दिए गए। जबकि ना तो यह कॉलोनी पंजीकृत है और ना ही यहां कोई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में यहां भूखंड लेने वालों को भविष्य में मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ेगा। इस पूरे मामले में लगातार खबर प्रकाशन के बाद सीधा सवाल की खबर पर गंभीर रवैया अपनाते हुए जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने पूरे मामले में जांच करते हुए कार्रवाई करने गए निर्देश दिए हैं।
इसलिए जरूरी है पंजीकरण
किसी भी क्षेत्र में कृषि भूमि को आवासीय भूमि परिवर्तन के लिए कॉलोनाइजर द्वारा सक्षम निकाय में आवेदन किया जाता है। इसके पश्चात टाउन प्लानर के पास नक्शा भेजा जाता है, जिसमें सड़क, रोशनी , नाली, जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भूमि आरक्षित करते हुए कॉलोनाइजर को इन सुविधाओं के लिए पाबंद किया जाता है। सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने तक एक निश्चित अनुपात में स्वीकृत पट्टों को रोका जाता है। जिससे कि कॉलोनाइजर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी नहीं कर सके। लेकिन चंद्र नगर के मामले में कोई स्वीकृति नहीं ली गई,नियमों के विपरीत 85% भूमि पर भूखंड दर्शाकर जमीन बेच दी गई है। इससे स्पष्ट है कि यहां पार्क और नसार्वजनिक उपयोग की भूमि आरक्षित रखी नही रखी गई है। केवल अवैध कॉलोनाइजरों द्वारा अपने फायदे के लिए कृषि भूमि को हस्तांतरण के माध्यम से बटवारा कर विक्रय किया जा रहा है।
मानव जीवन के लिए भी हानिकारक अवैध कॉलोनी
गंदे पानी की निकासी और मूलभूत सुविधाओं का अभाव आम जन जीवन के लिए भी हानिकारक है। ऐसी अवैध कॉलोनी में भूखंड खरीद कर मकान बनाने वाले लोगों पर मौसम जनित बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। वहीं सड़क बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी पंजीकरण नहीं होने की स्थिति में लोगों परेशानियां उठानी पड़ती है। ऐसे में अवैध चंद्रनगर में भूखंड लेकर मकान बनाने का सपना देखने वाले लोगों को ऐसी परेशानियों से रूबरू होना पड़ेगा।
सावधान हो जाए खरीददार...|
हाल ही में समीपवर्ती मध्य प्रदेश राज्य के चित्तौड़गढ़ जिले की सीमा से सटे नीमच जिले के जिला कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने सार्वजनिक अपील भी जारी की है,किसी भी प्रकार की अवैध कॉलोनी में भूखंड खरीदने पर बिजली ,सड़क ,नाली, बैंक लोन में परेशानी जैसी समस्याए होती है। इसलिए लोग इनमें भूखण्ड नहीं खरीदे। वहीं अब चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने भी अवैध रूप से कॉलोनी के रूप में लॉटरी के माध्यम से बेचे जा रहे चंद्रनगर के भूखंडों को लेकर जांच शुरू की है। ऐसी स्थिति में अब लोगों को आगे बढ़कर अवैध रूप से कॉलोनी बताकर जमीन बेचने वालों के खिलाफ स्वर मुखर करने चाहिए जिससे कि प्रशासन को धोखे में रखकर सरकार और ग्राहक दोनों को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई कर सके। फिलहाल चंद्र नगर में तहसीलदार गंगरार के माध्यम से भूमि बंटवारे की रजिस्ट्री से जमीन बेचने का सिलसिला जारी है। वही इसे पंजीकृत करवाने के दावे भी किया जा रहे हैं लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ भी नहीं है।
इनका कहना है...
हमने मौके पर टीम भेजी है। पूरे मामले की जांच कर कार्यवाही की जाएगी। जो भी विधि सम्मत कार्यवाही बनती है उसे अमल में लाया जाएगा।
कैलाश चंद्र गुर्जर, सचिव नगर विकास न्यास चित्तौड़गढ़