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सीधा सवाल। कपासन। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव डॉ. ललित बोरीवाल ने केंद्र सरकार के बजट 2025-26 पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट विकास का नहीं, बल्कि घोषणाओं, अधूरे वादों और खर्च न कर पाने की सरकारी अक्षमता का दस्तावेज़ है।डॉ. बोरीवाल ने कहा कि सरकार बार-बार बड़े-बड़े दावे करती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपनी ही घोषित योजनाओं के लिए आवंटित बजट खर्च करने में केंद्र सरकार बुरी तरह विफल रही है। यह केवल प्रशासनिक असफलता नहीं, बल्कि जनता के साथ सीधा धोखा है।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आयुष मिशन, जो आम आदमी की बीमारी, पीड़ा और स्वास्थ्य राहत के लिए बनाया गया था, उसमें केवल 61.2 प्रतिशत राशि ही खर्च की गई। वहीं राजस्थान में जन-स्वास्थ्य की रीढ़ मानी जाने वाली चिरंजीवी योजना को बंद कर देना इस बात का प्रमाण है कि भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं में आम नागरिक का जीवन नहीं है।शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की कथनी और करनी का अंतर और भी गंभीर है। पीएम श्री योजना, जो देश के सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए लाई गई थी, उसमें 40 प्रतिशत बजट खर्च ही नहीं किया गया, जबकि राजस्थान में महात्मा गांधी अंग्रेज़ी माध्यम स्कूलों को बंद करने की साजिशें चलती रहीं। इससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार बच्चों के भविष्य के प्रति कितनी असंवेदनशील है।डॉ. बोरीवाल ने कहा कि शहरों को विकास केंद्र बनाने के नाम पर शुरू किया गया Urban Challenge Fund भी एक खोखला नारा साबित हुआ, जिसमें मात्र 10 प्रतिशत राशि ही खर्च की गई। इसी तरह केंद्र में राजस्थान के मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत अपने विभाग की उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटते रहते हैं, लेकिन जल जीवन मिशन, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुँचाना था, उसमें भी केवल 25 प्रतिशत बजट ही खर्च किया गया।उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन की असलियत कपासन में सबके सामने हैं। जहाँ पानी की मांग करना अपराध बना दिया गया। सूरज माली जैसे नागरिकों के पैर तोड़ दिए गए, 15 दिनों तक आंदोलन चला, विधायक के नामजद एफ आई आर दर्ज हुई, लेकिन सरकार टस से मस नहीं हुई। इतना ही नहीं, बनास नदी से कपासन धमाना तालाब में पानी लाने के लिए घोषित 25 करोड़ रुपये का एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया। यह बजट नहीं, जनता के साथ क्रूर मज़ाक है।डॉ. बोरीवाल ने कहा कि सरकार 2026-27 के बजट में किसानों को एआई से जोड़कर उन्नत खेती के सपने दिखा रही हैं। जबकि पिछले बजट का केवल 40 प्रतिशत ही खर्च किया गया। इसी तरह अनुसंधान एवं नवाचार योजना में महज 15 प्रतिशत, युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने वाली पी एम इंटरंशिप योजना में केवल 5 प्रतिशत राशि ही खर्च की गई।उन्होंने आरोप लगाया कि पी एम आवास योजना ग्रामीण व शहरी, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण योजनाओं को भी जानबूझकर हाशिये पर डाल दिया गया। योजनाएं कागजों में रहीं और जनता समस्याओं से जूझती रही।डॉ. ललित बोरीवाल ने सवाल किया कि अगर पैसा खर्च नहीं हुआ, तो सरकार बताए कि यह पैसा गया कहाँ ? क्या इसे सरेंडर किया गया या कहीं और इस्तेमाल कर लिया गया ? जनता को इसका पूरा हिसाब चाहिए।उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सांसद हनुमान बेनीवाल सहित कई वरिष्ठ नेता कपासन आकर जनता के लिए न्याय मांग चुके हैं, लेकिन भजन लाल सरकार और केंद्र सरकार पर कोई असर नहीं हुआ, जो उनकी संवेदनहीनता और अहंकार को दर्शाता है।अंत में डॉ. बोरीवाल ने कहा कि यह बजट विकास की गारंटी नहीं, बल्कि जवाबदेही से भागने की रणनीति है। कांग्रेस पार्टी इस जन-विरोधी सोच के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।