चित्तौड़गढ़ / निंबाहेड़ा - विजय दशमी पर आर्य समाज में शस्त्र पूजन
हर खबर की विश्वसनीयता का आधार " सीधा सवाल ", 10 हजार से अधिक डाउनलोड के लिए सभी का आभार। सूचना, समाचार एवं विज्ञापन के लिए संपर्क करे - 9602275899, 9413256933

चित्तौड़गढ़ - पैरोल पर छूटे आरोपित की हत्या करनेके लिए घूम रहा था हिस्ट्रीशीटर प्रभु सिंह, पुलिस से हुई मुठभेड़ पैर लगी गोली

  • बड़ी खबर

चित्तौड़गढ़ - खेती की जमीन पर अवैध खनन ; लाखो टन निकली मिट्टी, खनिज विभाग अनजान, सरकारी प्रोजेक्ट में उपयोग में लेने की आशंका

  • बड़ी खबर

चित्तौड़गढ़ / कनेरा - खेत की झोपड़ी पर गिरी आकाशीय बिजली, दादा-दादी और पोते की मौत; फसल की रखवाली करने गए थे तीनों

  • बड़ी खबर

चित्तौड़गढ़ / बस्सी - मोहर्रम के बाद बस्सी के खानिया बस्ती में दो पक्षों के बीच लट्ठमार व पथराव, कई घायल*

  • बड़ी खबर
प्रमुख खबरे
* चित्तौड़गढ़ - पैरोल पर छूटे आरोपित की हत्या करनेके लिए घूम रहा था हिस्ट्रीशीटर प्रभु सिंह, पुलिस से हुई मुठभेड़ पैर लगी गोली * चित्तौड़गढ़ - खेती की जमीन पर अवैध खनन ; लाखो टन निकली मिट्टी, खनिज विभाग अनजान, सरकारी प्रोजेक्ट में उपयोग में लेने की आशंका * चित्तौड़गढ़ / कनेरा - खेत की झोपड़ी पर गिरी आकाशीय बिजली, दादा-दादी और पोते की मौत; फसल की रखवाली करने गए थे तीनों * चित्तौड़गढ़ / बस्सी - मोहर्रम के बाद बस्सी के खानिया बस्ती में दो पक्षों के बीच लट्ठमार व पथराव, कई घायल* * जनभावना का हुआ सम्मान, अब ’आबूराज’ के नाम से जाना जाएगा माउंट आबू * CM की सभा में पानी की बोतल पर बवाल: युवक से कथित मारपीट के आरोप, टाउन हॉल में गरमाया माहौल * चित्तौड़गढ़ / निंबाहेड़ा - एडीजी राघवेंद्र सिंह सुहासा ने किया निंबाहेड़ा का दौरा, नशे और बढ़ती चोरी की घटनाओं पर जताई चिंता * चित्तौड़गढ़ - डोडा चूरा नष्ट नहीं करवाने वाले अफीम किसानों को नहीं मिलेगा पट्टा * चित्तौड़गढ़ / निंबाहेड़ा - निंबाहेड़ा सब्जी मंडी में भीषण आग, कैरेटों ने बढ़ाई तबाही * अमीरगढ़ बालाराम ब्रिज के पास हादसा,नौ गाड़ियों की भिड़ंत में एक की मौत * चित्तौड़गढ़ - संदिग्ध अवस्था में मिला महिला का निर्वस्त्र शव, पुलिस जुटी मामले की जांच में * प्रतापगढ़ / छोटीसादड़ी - छोटीसादड़ी थाने में महिला कांस्टेबल ने की आत्महत्या, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप, एसपी सहित प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे मौके पर * प्रतापगढ़ / छोटीसादड़ी - धोलापानी थानाधिकारी रिश्वत मामले में डिटेन, एसीबी ने 2.87 लाख रुपए किए बरामद * प्रतापगढ़ / छोटीसादड़ी - 25 हजार के इनामी बदमाश को जंगल से पकड़ा, पुलिस पर पत्थर फेंककर भागने की कोशिश * चित्तौड़गढ़ - फर्जीवाड़े का पर्दाफाश बंद करवाई पेंशन, एआरटी केंद्र के कार्मिक द्वारा दोहरा लाभ लेने का मामला
हर खबर की विश्वसनीयता का आधार " सीधा सवाल ", 10 हजार से अधिक डाउनलोड के लिए सभी का आभार। सूचना, समाचार एवं विज्ञापन के लिए संपर्क करे - 9602275899, 9413256933
प्रमुख खबरे
* चित्तौड़गढ़ - पैरोल पर छूटे आरोपित की हत्या करनेके लिए घूम रहा था हिस्ट्रीशीटर प्रभु सिंह, पुलिस से हुई मुठभेड़ पैर लगी गोली * चित्तौड़गढ़ - खेती की जमीन पर अवैध खनन ; लाखो टन निकली मिट्टी, खनिज विभाग अनजान, सरकारी प्रोजेक्ट में उपयोग में लेने की आशंका * चित्तौड़गढ़ / कनेरा - खेत की झोपड़ी पर गिरी आकाशीय बिजली, दादा-दादी और पोते की मौत; फसल की रखवाली करने गए थे तीनों * चित्तौड़गढ़ / बस्सी - मोहर्रम के बाद बस्सी के खानिया बस्ती में दो पक्षों के बीच लट्ठमार व पथराव, कई घायल* * जनभावना का हुआ सम्मान, अब ’आबूराज’ के नाम से जाना जाएगा माउंट आबू * CM की सभा में पानी की बोतल पर बवाल: युवक से कथित मारपीट के आरोप, टाउन हॉल में गरमाया माहौल * चित्तौड़गढ़ / निंबाहेड़ा - एडीजी राघवेंद्र सिंह सुहासा ने किया निंबाहेड़ा का दौरा, नशे और बढ़ती चोरी की घटनाओं पर जताई चिंता * चित्तौड़गढ़ - डोडा चूरा नष्ट नहीं करवाने वाले अफीम किसानों को नहीं मिलेगा पट्टा * चित्तौड़गढ़ / निंबाहेड़ा - निंबाहेड़ा सब्जी मंडी में भीषण आग, कैरेटों ने बढ़ाई तबाही * अमीरगढ़ बालाराम ब्रिज के पास हादसा,नौ गाड़ियों की भिड़ंत में एक की मौत * चित्तौड़गढ़ - संदिग्ध अवस्था में मिला महिला का निर्वस्त्र शव, पुलिस जुटी मामले की जांच में * प्रतापगढ़ / छोटीसादड़ी - छोटीसादड़ी थाने में महिला कांस्टेबल ने की आत्महत्या, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप, एसपी सहित प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे मौके पर * प्रतापगढ़ / छोटीसादड़ी - धोलापानी थानाधिकारी रिश्वत मामले में डिटेन, एसीबी ने 2.87 लाख रुपए किए बरामद * प्रतापगढ़ / छोटीसादड़ी - 25 हजार के इनामी बदमाश को जंगल से पकड़ा, पुलिस पर पत्थर फेंककर भागने की कोशिश * चित्तौड़गढ़ - फर्जीवाड़े का पर्दाफाश बंद करवाई पेंशन, एआरटी केंद्र के कार्मिक द्वारा दोहरा लाभ लेने का मामला




रावण वध से पूर्व भी होता था विजय दशमी का आयोजन

सीधा सवाल। निम्बाहेड़ा। आर्य समाज प्रधान रविंद्र साहू नें हवन और शस्त्र पूजन करवाया जिसमें राधेश्याम धाकड़ और अरविंद कुमावत मुख्य यजमान बने दशरथ पाटीदार, भरत आर्य, विशाल साबू, रतनलाल राजोरा, किशनलाल माली, प्रभुलाल बैरवा, शिवलाल आँजना आदि ने आहुतियाँ दी। विशाल साबू ने बताया कि शौर्य, पराक्रम और क्षात्रधर्म का पर्व विजय दशमी आर्यों के प्रमुख पर्वों में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि विजयदशमी के नाम से जानी जाती है। यह एक वैदिक पर्व है जो आर्य जाति के शौर्य, तेज, बल तथा क्षात्रवृत्ति का परिचायक है। यह तो भगवान् राम के आविर्भाव और रावण वध के पहले से चला आ रहा क्षात्रधर्म का प्रतीक पर्व है। वैदिक धर्म में ब्रह्म शक्ति और क्षत्र शक्ति के समन्वित विकास की बात कही गई है। भारत के इतिहास तथा परम्परा में क्षात्रवृत्ति का अनुसरण करने वाले वीरों की गौरव गाथा का विस्तारपूर्वक उल्लेख मिलता है। त्रेतायुग के दशरथ पुत्र वीरों का उल्लेख हमें स्मरण दिलाता है कि अत्याचार, अनाचार तथा आसुरी वृत्तियों को पराजित करने के लिए राम ने कितना पुरुषार्थ किया था। उनका वन गमन इसी उद्देश्य से हुआ था। मानसकार ने राम के मुख से कहलाया है- निशिचरहीन करौ मही भुज उठाय प्रण कीन। राम ने भुजा उठाकर प्रतिज्ञा की- मैं इस धरती को असुरों से रहित कर दूंगा।

यजुर्वेद में कहा गया है-

यत्र ब्रह्मं च क्षत्रं च सम्यञ्चौ चरत: सह:।
जहां ब्रह्म और क्षत्र विद्वता और पराक्रम का समुचित समन्वय रहता है वहां पुण्य, प्रज्ञा तथा अग्नि तुल्य तेज और ओज रहता है। विजयदशमी तक वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है। प्राचीन काल में लगभग तीन चार मास तक निरन्तर वर्षा होती रहती थी। वीरों की विजय यात्राएं बंद हो गईं। अब बरसात के समाप्त होने पर रास्ते खुल गए। सेनाओं के आने जाने की कठिनाई दूर हो गई। इस ऋतु परिवर्तन का लाभ उठाकर प्राचीन काल में क्षत्रिय इस दिन अपने शस्त्रास्त्रों की सफाई करते थे। उन्हें पुनः काम में लाने लायक बनाते थे तथा राजाज्ञा से शास्त्रों की प्रदर्शनी लगाई जाती थी। वीर लोगों को अपनी अस्त्र शस्त्र विद्या के सार्वजनिक प्रदर्शन का अवसर मिलता था। आम जनता भी इन वीरों की शस्त्र विद्या तथा शौर्य प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित होती थी। महाभारत में यह प्रसंग विस्तार से आता है जहां यह उल्लिखित हुआ है कि पितामह भीष्म के आदेश से आचार्य द्रोण ने अपने शिष्यों (कौरव एवं पाण्डव) को शस्त्रास्त्र कौशल को दिखाने के लिए एकत्र किया था। यह प्रदर्शन सार्वजनिक था।

रावण वध से पूर्व भी होता था विजय दशमी का आयोजन


सीधा सवाल। निम्बाहेड़ा। आर्य समाज प्रधान रविंद्र साहू नें हवन और शस्त्र पूजन करवाया जिसमें राधेश्याम धाकड़ और अरविंद कुमावत मुख्य यजमान बने दशरथ पाटीदार, भरत आर्य, विशाल साबू, रतनलाल राजोरा, किशनलाल माली, प्रभुलाल बैरवा, शिवलाल आँजना आदि ने आहुतियाँ दी। विशाल साबू ने बताया कि शौर्य, पराक्रम और क्षात्रधर्म का पर्व विजय दशमी आर्यों के प्रमुख पर्वों में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि विजयदशमी के नाम से जानी जाती है। यह एक वैदिक पर्व है जो आर्य जाति के शौर्य, तेज, बल तथा क्षात्रवृत्ति का परिचायक है। यह तो भगवान् राम के आविर्भाव और रावण वध के पहले से चला आ रहा क्षात्रधर्म का प्रतीक पर्व है। वैदिक धर्म में ब्रह्म शक्ति और क्षत्र शक्ति के समन्वित विकास की बात कही गई है। भारत के इतिहास तथा परम्परा में क्षात्रवृत्ति का अनुसरण करने वाले वीरों की गौरव गाथा का विस्तारपूर्वक उल्लेख मिलता है। त्रेतायुग के दशरथ पुत्र वीरों का उल्लेख हमें स्मरण दिलाता है कि अत्याचार, अनाचार तथा आसुरी वृत्तियों को पराजित करने के लिए राम ने कितना पुरुषार्थ किया था। उनका वन गमन इसी उद्देश्य से हुआ था। मानसकार ने राम के मुख से कहलाया है- निशिचरहीन करौ मही भुज उठाय प्रण कीन। राम ने भुजा उठाकर प्रतिज्ञा की- मैं इस धरती को असुरों से रहित कर दूंगा।


यजुर्वेद में कहा गया है-


यत्र ब्रह्मं च क्षत्रं च सम्यञ्चौ चरत: सह:।

जहां ब्रह्म और क्षत्र विद्वता और पराक्रम का समुचित समन्वय रहता है वहां पुण्य, प्रज्ञा तथा अग्नि तुल्य तेज और ओज रहता है। विजयदशमी तक वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है। प्राचीन काल में लगभग तीन चार मास तक निरन्तर वर्षा होती रहती थी। वीरों की विजय यात्राएं बंद हो गईं। अब बरसात के समाप्त होने पर रास्ते खुल गए। सेनाओं के आने जाने की कठिनाई दूर हो गई। इस ऋतु परिवर्तन का लाभ उठाकर प्राचीन काल में क्षत्रिय इस दिन अपने शस्त्रास्त्रों की सफाई करते थे। उन्हें पुनः काम में लाने लायक बनाते थे तथा राजाज्ञा से शास्त्रों की प्रदर्शनी लगाई जाती थी। वीर लोगों को अपनी अस्त्र शस्त्र विद्या के सार्वजनिक प्रदर्शन का अवसर मिलता था। आम जनता भी इन वीरों की शस्त्र विद्या तथा शौर्य प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित होती थी। महाभारत में यह प्रसंग विस्तार से आता है जहां यह उल्लिखित हुआ है कि पितामह भीष्म के आदेश से आचार्य द्रोण ने अपने शिष्यों (कौरव एवं पाण्डव) को शस्त्रास्त्र कौशल को दिखाने के लिए एकत्र किया था। यह प्रदर्शन सार्वजनिक था।


What's your reaction?